आदिवासी समाज की शिक्षा एवं विकास में नारायण सेवा संस्थान का योगदान
आदिवासी समाज की शिक्षा एवं विकास में नारायण सेवा संस्थान का योगदान
  22 Mar'2022

आदिवासी शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ है आदिकालीन ढंग से जंगलों में रहने वाली जनजाति, किसी स्थान पर रहने वाले वहाँ के मूल निवासी | जैसे- संथाल, मुंडा आदि। भारत सरकार ने आदिवासी समाज को संविधान की पांचवी अनुसूची में " अनुसूचित जनजातियों " के रूप में मान्यता दी है। भारत में अनुसूचित आदिवासी समूहों की संख्या 700 से अधिक है। भारत की जनसँख्या का 8.6% (10 करोड़) हिस्सा आदिवासियों का है | प्रतिवर्ष 9 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस मनाया जाता है |

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है- "हमें आदिवासियों के अधिकारों के संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए। आदिवासी धरती माता के साथ एक विशेष बंधन साझा करते हैं और प्रकृति की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।"

"धरती माँ समस्याओं से ग्रस्त है और केवल आदिवासी जीवन शैली ही इसे क्षय से बचा सकती है। ग्लोबल वार्मिंग, अप्रत्याशित जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियरों का पिघलना, सूनामी, अकाल और बाढ़ प्रकृति के साथ मनुष्य के अविचारणीय हस्तक्षेप के परिणाम हैं और अगर किसी को इनसे बचना है, तो एकमात्र तरीका आदिम रास्ते को अपनाना है।”

आदिवासी समाज पर भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के विचार-

(1) लोगों को अपनी प्रतिभा के अनुसार विकसित होना चाहिए, और विदेशी मूल्यों को थोपने से बचना चाहिए।

(2) भूमि और जंगल में आदिवासी अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए

(3) आदिवासियों की टीमों को प्रशासन और विकास के कार्यों में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।

(4) जनजातीय क्षेत्रों को अत्यधिक प्रशासित या योजनाओं की बहुलता से अभिभूत नहीं होना चाहिए।

(5) परिणामों को आंकड़ों या खर्च की गई राशि से नहीं, बल्कि विकसित मानव चरित्र से आंका जाना चाहिए।

राजस्थान में टीएसपी क्षेत्र  :-

टीएसपी का अर्थ है है ट्राइबल सब एरिया प्लान (अनुसूचित क्षेत्र) | टीएसपी एरिया में राजस्थान के ऐसे क्षेत्रों को शामिल किया जाता है जिनमें 50% या इससे ज्यादा आदिवासी लोग निवास करते हैं।  प्रतापगढ़, बांसवाड़ा और डूंगरपुर पूर्ण रूप से टीएसपी क्षेत्र में आते हैं। उदयपुर जिले की पूर्ण 8 तहसीलें और गिर्वा तहसील के 252 गांव, वल्लभनगर के 22 व मावली के 4 गांव, सिरोही जिले की आबूरोड तहसील और पिंडवाड़ा तहसील के 51 गांव, , पाली जिले की बाली तहसील के 33 गांव, चितौड़गढ़ जिले की बड़ीसादड़ी तहसील के 51 गांव, राजसमंद जिले की नाथद्वारा तहसील के 15 और कुंभलगढ़ तहसील के 16 गांव |

आदिवासी समाज की मुख्य समस्याऐं :-

पक्के मकान का अभाव, शुद्ध जल का अभाव, पेयजल वितरण के साधनों का अभाव, निर्धनता के शिकार, अधिकांश लोग शराब के चंगुल में फंसे है, शिक्षा का अभाव, रोज़गार की अनुपलब्धता, बहुत कम मज़दूरी पर दैनिक काम करना, स्वास्थ्य सुविधाओं की अनुपलब्धता, स्त्रियों व बच्चों में शिक्षा का अभाव इत्यादि |

सरकार के प्रयास :-

अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए बुक-बैंक की व्यवस्था करना, छात्रवृत्ति, लेखन सामग्री, किताबें, खेल सामग्री की आपूर्ति, अनुसुचित जनजाति के विद्यार्थियों को उपस्थिति पुरूस्कार, आवासीय विद्यालय व छात्रावास, मेरिट स्कोलरशिप, दोपहर भोजन, शैक्षिक भ्रमण इत्यादि सुविधाएं देने के बाद भी आदिवासी समाज की दशा सुधार के लिए और प्रयास की आवश्यकता है |

नारायण सेवा संस्थान द्वारा आदिवासी समाज की शिक्षा के उत्थान में योगदान :-

संस्थान आदिवासी बच्चों को शिक्षित एवं जागरूक करने के लिए कई तरह से प्रयासरत है | संस्थान नारायण चिल्ड्रन अकादमी (एन सी ए) के द्वारा निकटवर्ती क्षेत्र के निर्धन आदिवासी बच्चों को निःशुल्क अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा प्रदान करने का कार्य कर रहा है | वर्तमान में 337 बच्चे एन सी ए में अध्ययन कर रहे है | एन सी ए में कुल 400 सीटें है और अब तक हज़ारों बच्चे लाभान्वित हो चुके है | संस्थान आवासीय विद्यालय संचालित करता है जिसमें आदिवासी बच्चे पढ़ते एवं रहते है | ये ऐसे बच्चे-बच्ची है जिनका परिवार शिक्षा के लिए खर्च वहन नहीं कर सकता है | संस्थान इन बच्चों को निःशुल्क सुविधाऐं देता है | वर्तमान में संस्थान के आवासीय विद्यालय में 100 सीटें है जिनमें 85 जरूरतमंद बच्चे पढ़ रहे है | अब तक हज़ारों बच्चों को आवासीय विद्यालय से लाभ मिल चुका है | संस्थान भगवान महावीर निराश्रित बालगृह (बी एम एन बी) का संचालन करता है | ऐसे बच्चे जो अनाथ है, वो यहाँ निशुल्क रहते एवं पढ़ते हैं | बी एम एन बी में कुल 200 सीटें है जिनमें से वर्तमान में 134 सीटें भरी हुयी है | अब तक हज़ारों बच्चे बी एम एन बी से लाभान्वित हो चुके है |

शिक्षा के अलावा संस्थान के आदिवासी समाज को समर्पित अन्य कार्य :-

रोटी, कपडा एवं मकान हर व्यक्ति की आधारभूत आवश्यकता है | अगर आदिवासी समाज को यह सुविधाएं मिलती है तो यह समाज शिक्षा की तरफ तेज़ी से अग्रसर हो सकेगा | नारायण सेवा संस्थान "रोटी-कपडा-मकान योजना” के तहत आदिवासी समाज के लोगों को निशुल्क अन्न वितरण करती है उन्हें निशुल्क स्कूल पौशाक, वस्त्र, स्वेटर, कम्बल का वितरण किया जाता है एवं उनके लिए निशुल्क मकान बनाया जाता है | इसके अलावा नशेड़ी लोगो को नशामुक्ति संकल्प दिलाना, आदिवासी इलाकों में हैंडपंप लगवाना, भोजन पैकेट वितरित करना, गाँव-गाँव जाकर लोगों की समस्याए सुनना और उन समस्याओं को हल करना, आदिवासी बच्चों को नहलाना एवं उनके नाखुन काटना, निशुल्क टूथपेस्ट का वितरण करना इत्यादि महत्वपूर्ण कार्य नारायण सेवा संस्थान करता है |

 
 
 

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