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Kumbh Sahayog 2019              Volunteer Internship at Kumbh Prayagraj

देवानाम् द्वादशाहोभिर्मत्यै द्वार्दशवत्सरेः।
जायन्ते कुपर्वाणि तथा द्वादश संख्ययाः।।
गंगाद्वारे प्रयागे च धारा गोदावरी तटे।
कलसाख्योहि योगोहयं प्रोच्यते शंकरादिभि : ।।
मेषराशिगते जीवे मकरे चन्द्रभास्करौ ।
अमावस्या तदा योग कुंभख्यस्तीर्थ नायके।।

पुण्य तीर्थ स्थानों में जाकर दर्शन एवं डुबकी से मानव काया और भाव से पवित्र, निष्पाप और मुक्ति भागी होता है | इसलिए हर धर्मप्राण नर-नारी को कुम्भयोग में जाकर अपने स्व कल्याण के लिए यह सत्कर्म अवश्य करना चाहिए |
स्कन्दपुराण के अनुसार कुंभ पर्व में जो भी प्राणी शुभ कामना या इच्छा से स्नान करता है , उसकी मनोकामना भगवान शीघ्र ही पूरी करते है |

नारायण सेवा संस्थान की एक सेवाभरी अपील
जीवन पल - पल रंग बदलने वाला है और मनुष्य के द्वारा कमाई जाने वाली लक्ष्मी चंचला है .... वह सदैव किसी के पास नहीं रहती | इसीलिए धन होने पर दान के रूप में देना ही शोभा है | तीर्थराज प्रयाग में रघु, मर्यादा पुरषोतम भगवान श्रीराम, सम्राट समुन्द्र गुप्त और हर्षवर्धन जैसे सम्राटो ने भी अनेक दान किये थे | प्रयाग की महिमा अनंत है | कुम्भ के पर्व पर दान की महिमा के सम्बन्ध में शास्त्रों में एक कथा आती है कि सम्राट हर्षवर्धन हर कुम्भ मेले में जाते थे और वे बारी बारी से भगवान सूर्य , शिव और बुध का पूजन करते थे | पूजन के बाद दीन दुःखियों , जरुरतमंदो और ब्राह्मणों को दान देते थे | सम्राट हर्षवर्धन कुम्भ में दान लिए खजाने का मोटा हिस्सा ले कर उपस्थित होते थे | दान में यहाँ तक वे अपने राजसी वस्त्र भी दान कर देते थे | फिर अपनी बहन राजश्री से कपड़े मांगकर पहनते थे | इतने दानवीर थे सम्राट हर्षवर्धन |

ऐसे प्रेरणादायी कुम्भ गाथा और मानव सेवा के शुभ संकल्प से नारायण सेवा , उदयपुर प्रत्येक कुम्भ में सेवा सत्संग कथा , शिविर भंडारा जैसी सेवाए निःशुल्क प्रदान करता है | ऐसे सेवा प्रकल्पो में संस्थान अपने हज़ारो दानवीर - भामाशाओं को सेवा का अवसर प्रदान करने के लिए एक सेतु की भूमिका निभा रहा है | साथ ही अपने दानदाताओ और करुणा हृदयी सज्जनो को कुम्भ के पावन अवसर पर सपरिवार पधारने का सादर आमंत्रण दे रहा है |

प्रयागराज कुम्भ 2 0 1 9 के प्रमुख तारीखें

दिनांक
विवरण
14 जनवरी 2019 / सोमवार -
कुम्भ पर्व का प्रारम्भ (शाही स्नान ) / मकर सक्रांति
21 जनवरी 2019 / सोमवार -
पोष पूर्णिमा - पुष्य योग (शाही स्नान )
04 फरवरी 2 0 1 9 / सोमवार -
मौनी अमावस्या स्नान (शाही स्नान)
10 फरवरी 2 0 1 9 / रविवार -
बसंत पंचमी स्नान (शाही स्नान )
19 फरवरी 2 0 1 9 / मंगलवार -
माघ पूर्णिमा स्नान
02 मार्च 2 0 1 9 / शनिवार -
विजय एकादशमी स्नान
04 मार्च 2 0 1 9 / सोमवार -
महाशिवरात्रि (सवार्थ सिद्धि योग) स्नान
06 मार्च 2 0 1 9 / बुधवार -
फाल्गुन अमावस्या स्नान

KUMBH SEWARTH SAHYOG

AAWAS VAYAVASTHA (SINGLE ROOM DAILY)
1500
DOORMETRY
500
BHOJAN SAHYOG (ONE TIME DAILY)
2100
AWAS VAYAVASTHA (4 to 6 PERSON DAILY)
2100

CONTRIBUTION FOR KUMBH FOOD

KUMBH PRASADI VITRAN YAJMAAN DAILY
51000
ONE TIME FOOD (FOR 50 PATIENT)
11000
TWO TIME FOOD (FOR 50 PATIENT)
22000

CONTRIBUTION FOR KUMBH YAJMAN

KUMBH KATHA MUKHY YAJMAAN ONE TIME DAILY
151000
KUMBH AARTI YAJMAAN DAILY
5100
KUMBH VYAS PUJAN YAJMAAN DAILY
2100
KUMBH BHOJAN MAHAPRASAD YAJMAAN ONE TIME
5100
KUMBH JAL SAHYOG DAILY
5100
KUMBH NASHTA SAHYOG DAILY
5100
Total Amount Rs.

कुम्भ मेला 2019

"कुम्भ पर्व" हिन्दु धर्म का विशेष पर्व है जिसमें करोड़ो भक्तगण आस्था और श्रद्धा के साथ स्नान करते है। हिन्दु मान्यताओं के अनुसार कुम्भ मेला मकर सक्रांति के दिन आरम्भ होता है जब सूर्य और चन्द्रमा वृश्चिक राशि में एवं बृहस्पति, मेष राशि में प्रवेश करता है। यह दिन विशेष मंगलकारी होता है। क्योंकि माना जाता है कि इस दिन धरती से स्वर्ग लोक के द्वार खुलते है और श्रद्धा पूर्वक स्नान करने से आत्मा का परमात्मा से मिलन में सहजता हो जाती है। "कुम्भ मेले" के अवसर पर स्नान करने से स्वर्ग में भी दर्शन के द्वार खुलते है।

कुम्भ मेले का इतिहास

कथाओं के अनुसार कुम्भ की शुरुआत समुन्द्र मंथन से मानी जाती है। कुछ इतिहास विदो के अनुसार लगभग 350 वर्ष पूर्व आदि शंकराचार्य ने कुंभ मेले का आगाज किया था। शास्त्रों के अनुसार - समुन्द्र मंथन के दौरान अमृत कलश में से अमृत की बूंदे हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में गिरी थी। इसलिए इन चारों स्थलों पर हर 3 वर्ष के बाद मेला भरता है। 12 वर्ष के पश्चात् यह मेला अपने पहले स्थान पर पहुँच जाता है। कुछ दस्तावेजों के अनुसार कुम्भ मेला 525 BC में शुरू हुआ। शास्त्रों में वर्णित है कि पृथ्वी का एक वर्ष देवताओं का एक दिन होता है इसीलिए हर बारह वर्ष बाद एक स्थान पर कुम्भ का आयोजन होता है। देवताओं का 12 वर्ष पृथ्वीलोक के 144 वर्ष है। इसीलिए 144 वर्षो के बाद स्वर्ग में भी देवताओ के द्वारा कुम्भ का आयोजन किया जाता है।

2019 में लगेगा - प्रयागराज में कुम्भ मेला

मेष राशि के चक्र में गुरु और सूर्य व चंद्र का मकर राशि में प्रवेश करने पर अमावस्या के दिन प्रयाग में कुम्भ पर्व आयोजित किया जाता है | त्रिवेणी के संगम पर आयोजित कुम्भ में स्नान-दान-ध्यान करने का विशेष महत्व है। जन्म जन्मान्तर के पापों का क्षय करने का पुनीत अवसर है यह कुम्भ। प्राणी मोक्ष का भागीदार बनता है।

अबकी बार यह कुम्भ मेला विशेष फलदायी है क्योंकि सोमवती अमावस्या के दिन श्रवण, नक्षत्र, व्यतिपात योग, मौनी अमावस, महोदय योग और सवार्थ सिद्धि योग बना है। ऐसे सुखद संयोग कभी-कभार ही बन पाते है ऐसे दुर्लभ संयोग पर जो भी स्नान का पुण्य लाभ लेगा वो सौभाग्यशाली बन जायेंगे। तीर्थ राज प्रयाग कुम्भ में असंख्य श्रद्धालु, योगी, विरक्ति, तपस्वी, साधु, संत-सन्यासी एवं सदगृहस्थजन स्नानार्थ पधारते है अतः इसमें पधारे हुए भक्तों का दर्शन से भी दुःख दर्द निवारित हो जाते है।