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Kumbh Sahayog 2019              Gaya Pitra - Tarpan Sahyog 2018
गया जी का परिचय

राजधानी पटना से करीब 100 कि . मी दूर बसा है - गयाजी । धार्मिक दृष्टि से गया का विशेष महत्व है। गया हिन्दुओं के लिए पूजनीय है ही साथ ही बौद्ध धर्म में मानने बालो के लिए भी अति सम्मानीय नगरी हे।

बौद्ध धर्म वालों के लिए यह ज्ञान की नगरी है ओंर हिन्दुओं के लिए मुक्तिधाम । हिन्दुओं के लिए मुक्तिधाम होने के कारण यहाँ पर हिन्दु लोग अपने पूर्वजो का श्राद्ध और तर्पण यहाँ आकर करते है। धर्म की नगरी गया अति प्राचीन ओंन प्रसिद्ध है । यहाँ लोग पिन्डदान के लिए बर्ष पर्यन्त आते जाते रहते है ।

इतिहास

करीब 500 इपू गौत्तम बुद्ध फाल्गुनदी के किनारे पहुंचे और बोधि नामक पेड के नीचे बैठकर तपस्या की । मात्र तीन दिवस (रात-दिन) की तपस्या के पश्चात गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हो गई । इसके बाद गौतम - बुद्ध कहलाये। गौतम बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति के कारण अनुयायियों की संख्या में बद्धि हो गईं धीरे-धीरे लोग गया जी आने लगें आने वाले लोग दस जगह को बोधगया बोलने लगें । गौतम को बैशाखी की पूर्णिमा को ज्ञान प्राप्ति हुई थी इसीलिए इस तिथि का बुद्ध पुर्णिमा कहा जाता हैं।

GAYA SAHYOG

Pitra Tarpan ( one day)
5100
Pothi Pitra Tarpan (7 days) Yajman not present
21000
Pothi Pitra Tarpan (7 days), Bhojan, Aawas
31000
Total Amount Rs.

गयाजी का पौराणिक मह्त्व

पुराणों के अनुसार गयासुर नाम का एक राक्षस था उसने बिष्णु भगवान की आराधना करके वरदान पाया था कि उसके दर्शन और स्पर्श मात्र से व्यक्ति हो या पापी को यमलोक की बजाय बिष्णुलोक का गामी बनेगा।

इस कारण से विष्णुलोक में अधर्मीयों की संख्या बढ़ने लगी और हाहाकार मच गया । तब देवताओं ने विष्णुभगवान से प्रार्थना की और उपाय करने की विनती की । तब ब्रह्माजी ने गयासुर से कहा कि तुम अपने बरदान से बहुत ही पवित्र हो । इसके लिए अपनी पीट पर देवता हवन - पूजन करेंगे । गयासुर प्रसन्न हो गया । इसके बाद सभी देवतगण उसकी पीठपर सवार हो गये । गयासुर की पर एक शीला रख दी गई । इससे गयापुर का बलिदान हो गया ।

तब भगवान विष्णु ने एक वरदान यह दिया कि इस स्थान का नाम तुम्हारे नाम से जाना जायेगा और इस जगह पर जो भी अपने पुर्वजों और पित्रों का श्राद्ध करेंगे उन्हें मुक्ति मिल जायेगी ।

श्राद्धपक्ष

श्राद्ध पक्ष अपने पूर्वजो या पितरों को भोजन कराने का वर्ष मेँ एक बार आने वाला पवित्र दिन है । इस दिन हर व्यक्ति के स्वर्ग वासी आत्मा पिता-पुत्र-दादा-दादी-नाना-नानी अपने पुत्रों से श्रद्धापूर्वक भोजन प्रसाद पाने के लिए पृथ्वी पर आते है । अतः श्राद्ध पक्ष ने हमें भी अपने पितरों के निहित श्राद्ध पूर्वक पिंडदान या तर्पण अवश्य करना चाहिए ।

गया के अति पावन तट पर पिन्डदान करने से सात पीड़ियों को भी मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।

वर्ष 2018 में दिनांक 24 सितम्बर है 8 अक्टुबर 2018 तक पित्र पक्ष रहेगा। भाद्रपद माह की पूर्णिमा से श्राद्ध आंरम्भ होता है और अश्विन माह की अमावस्या तक श्राद्ध रहते है ।

श्राद्ध वाले दिन पितृों की पूजा हो, ब्राहमणों का भोजन हो। नारायण बली कर जा और सगे सम्बंधियों कदुम्बीयों को प्रेम पूर्वक भोजन कराने का विधान है ।